तंत्रिका तंत्र के रोग और आंत-मस्तिष्क संबंध की समझ
तंत्रिका तंत्र के रोग और आंत-मस्तिष्क संबंध की समझ
मानव शरीर में तंत्रिका तंत्र (Nervous System) सबसे महत्वपूर्ण तंत्र है। यह एक विद्युत नेटवर्क की तरह काम करता है, जो मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और शरीर के अंगों के बीच संदेश पहुँचाता है। केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System – CNS), जिसमें मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी शामिल हैं, विचार, भावनाएँ, गति और पाचन जैसी कई गतिविधियों को नियंत्रित करता है। जब इसमें गड़बड़ी होती है, तो विभिन्न स्नायु रोग (Neurological Disorders) और मानसिक रोग उत्पन्न होते हैं।
पिछले वर्षों में शोध ने यह भी साबित किया है कि हमारे मस्तिष्क और आंत के बीच एक गहरा संबंध है जिसे Gut-Brain Axis (आंत-मस्तिष्क धुरी) कहा जाता है। जब इस संचार में रुकावट आती है, तो इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) और अन्य पाचन संबंधी समस्याएँ सामने आती हैं।
प्रमुख तंत्रिका तंत्र के रोग
1. माइग्रेन (Migraine)
माइग्रेन केवल साधारण सिरदर्द नहीं है। यह एक गंभीर स्नायु रोग है जिसमें तीव्र धड़कन जैसा दर्द होता है। अक्सर इसके साथ उल्टी, रोशनी या आवाज़ की संवेदनशीलता और धुंधला दिखना जैसे लक्षण भी आते हैं। तनाव, नींद की कमी, हार्मोनल बदलाव और कुछ खास भोजन माइग्रेन को ट्रिगर कर सकते हैं।
2. मानसिक रोग (Psychiatric Disorders)
अवसाद (Depression), चिंता (Anxiety), द्विध्रुवी विकार (Bipolar Disorder) और स्किज़ोफ्रेनिया जैसी बीमारियाँ मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर के असंतुलन से होती हैं। इनका असर व्यक्ति की सोच, व्यवहार, याददाश्त और निर्णय लेने की क्षमता पर पड़ता है। आज की भाग-दौड़ वाली जीवनशैली और सामाजिक दबाव इन बीमारियों को और बढ़ा रहे हैं।
3. तनाव जनित रोग (Stress-Related Disorders)
लंबे समय तक तनाव केवल मानसिक स्थिति नहीं बल्कि शारीरिक बीमारियाँ भी लाता है। यह रक्तचाप बढ़ाता है, नींद खराब करता है और रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर करता है। लगातार तनाव पेट में अल्सर, सिरदर्द और हार्ट डिज़ीज़ तक का कारण बन सकता है।
4. अपक्षयी स्नायु रोग (Neurodegenerative Diseaseअल्ज़ाइमर, पार्किंसन और मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसे रोग धीरे-धीरे मस्तिष्क और नसों को क्षति पहुँचाते हैं। इससे स्मृति, गति और समन्वय बिगड़ता है।
आंत-मस्तिष्क धुरी (Gut-Brain Axis) क्या है?
हमारी आंत को "दूसरा मस्तिष्क" कहा जाता है क्योंकि इसमें Enteric Nervous System (ENS) नामक बड़ा स्नायु नेटवर्क होता है। यह पाचन और पोषण अवशोषण को नियंत्रित करता है। आंत और मस्तिष्क के बीच संपर्क वेजस नर्व (Vagus Nerve) और रसायनों के माध्यम से होता है।
CNS और आंत के बीच गड़बड़ी से होने वाले रोग
इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS)
इसमें पेट दर्द, सूजन, दस्त या कब्ज जैसे लक्षण होते हैं। यह संक्रमण से नहीं बल्कि मस्तिष्क और आंत की नसों के बीच गलत संदेश से होता है। तनाव और चिंता इस समस्या को और बढ़ाते हैं।फंक्शनल डिस्पेप्सिया (Functional Dyspepsia)
इसमें मरीज को बिना अल्सर के पेट में भारीपन और असहजता महसूस होती है। यह भी तनाव और स्नायु तंत्र की गड़बड़ी से जुड़ा है।गट माइक्रोबायोम असंतुलन (Gut Microbiome Imbalance)
आंत में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया पाचन और रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखते हैं। तनाव और गलत खानपान से यह असंतुलित हो जाते हैं, जिससे पाचन खराब होता है और मनोदशा पर भी असर पड़ता है।
जागरूकता क्यों ज़रूरी है?
अक्सर लोग सिरदर्द, तनाव या पेट की समस्या को अलग-अलग मानते हैं, जबकि ये सभी आपस में जुड़े हुए हैं।
काम का तनाव माइग्रेन के साथ IBS भी बढ़ा सकता है।
चिंता से पेट दर्द या दस्त हो सकता है।
अवसाद पाचन को धीमा कर कब्ज पैदा कर सकता है।
इसलिए मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों पर ध्यान देना आवश्यक है।
तंत्रिका और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के उपाय
तनाव प्रबंधन: योग, ध्यान और प्राणायाम करें।
संतुलित आहार: फाइबर, दही और किण्वित भोजन लें, जंक फूड से बचें।
पर्याप्त नींद: रोज़ाना 7–8 घंटे सोएँ।
व्यायाम: नियमित शारीरिक गतिविधि करें।
डॉक्टर की सलाह: लगातार माइग्रेन, तनाव या पाचन समस्या होने पर विशेषज्ञ से संपर्क करें।
निष्कर्ष
तंत्रिका तंत्र केवल हमारे विचार और गति ही नहीं बल्कि हमारे पाचन और भावनाओं को भी नियंत्रित करता है। माइग्रेन, मानसिक रोग और तनाव सीधे तौर पर आंत-मस्तिष्क संबंध को प्रभावित करते हैं। अगर हम इस संबंध को समझें और सही जीवनशैली अपनाएँ तो कई बीमारियों से बच सकते हैं।
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