आधुनिक युवाओं के लिए जीवन पद्धति में बदलाव के अलावा कोई आधुनिक दवा नहीं
आधुनिक युवाओं के लिए जीवन पद्धति में बदलाव के अलावा कोई आधुनिक दवा नहीं 🦆 बत्तख सिंड्रोम: जब युवा बाहर से शांत दिखते हैं, लेकिन भीतर उथल-पुथल मची होती है 🌟 भूमिका: शांत सतह, अशांत गहराई क्या आपने कभी किसी बत्तख को तालाब में तैरते देखा है? ऊपर से वह शांत, संतुलित और सुंदर दिखती है। लेकिन पानी के नीचे उसके पैर लगातार हिलते रहते हैं ताकि वह डूब न जाए। आज के कई युवाओं की यही स्थिति है। वे ब्रांडेड कपड़े पहनते हैं, सात्विक भोजन करते हैं, मंदिर जाते हैं, शांति की बातें करते हैं और इंस्टाग्राम पर आध्यात्मिक उद्धरण साझा करते हैं। उनके पास अच्छे घर हैं, कारें हैं, ज़मीनें हैं। बाहर से वे सभ्य, सफल और संतुलित लगते हैं। लेकिन अंदर से? वे टूटे हुए हैं। 🧘♂️ आध्यात्मिकता या दिखावा? आज की आध्यात्मिकता एक प्रदर्शन बन गई है। युवा मंत्र जपते हैं, रुद्राक्ष पहनते हैं, धर्म और कर्म की बातें करते हैं—लेकिन बिना गहराई के। तीर्थयात्राएं अब आत्मचिंतन के लिए नहीं, बल्कि सेल्फी के लिए होती हैं। यह सच्ची आध्यात्मिकता नहीं है। यह एक आध्यात्मिक ब्रांडिंग है—बिना आत्मिक परिश्रम के बुद्धिमान दिखने की कोशिश। 💼 स...